Khatu Shyam ji Temple


 खाटू श्याम मंदिर क्यों प्रसिद्ध है? Why Khatu Shyam ji Temple is so Famous?

बाबा श्याम का मंदिर अपने सौन्दर्य और भक्तों की आस्था की वजह से प्रसिद्ध है। यह पर बाबा श्याम के सिर की पूजा की जाती है। जो की भगवान श्री कृष्ण के रूप में पूजा जाता है। श्याम बाबा को श्रीकृष्ण जी से कलयुग में पूजे जाने का वरदान भी प्राप्त है इसलिए वर्तमान में खाटू श्याम मंदिर बहुत प्रसिद्ध है।

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खाटू श्याम मंदिर कब जाना चाहिए?

बाबा श्याम के मंदिर में जाने का कोई निर्धारित समय या दिनांक नहीं है भक्त अपनी आस्था के अनुसार कभी भी जाकर मंदिर दर्शन के लिए जा सकते है लेकिन मुख्य रूप से ज्यादातर भक्त एकादशी को बाबा श्याम के दर्शन के लिए जाते है और द्वादशी को बाबा श्याम का भोग लगाया जाता है और जोत ली जाती है। 


खाटू श्याम की कहानी क्या है?  What is the Story Behind Khatu Shyam ji

ग्रंथो के अनुसार श्याम बाबा श्री कृष्ण जी का अवतार माने जाते है। इनका नाम बर्बरीक है जो की घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र है। जब बर्बरीक महाभारत के युद्ध में भाग लेने जा रहे थे तो बीच उनकी मुलाकात कृष्ण जी से हुयी। जब बर्बरीक से पूछा की आपकी किसकी तरफ से युद्ध लड़ेंगे तो उनका जवाब था की जो हारेगा में उसका साथ दूंगा। 

यह सुन कृष्ण जी ने उनकी परीक्षा ली और बोले की तुम तीन बाण के साथ कैसे युद्ध कर पाओगे तो बर्बरीक बोलै की में इन तीन बाण के साथ में युद्ध का पूरा रुख बदल सकता हु। तो कृष्ण जी ने कहा की आप इस पीपल के सभी पत्तों को एक बाण से छेद कर के दिखाओ और उन्होंने एक पत्ता अपने पैर के निचे छुपा लिया। उसके बाद जब बाण सभी पत्तो को छेद कर कृष्ण जी के पैरों के पास आकर रुक गया और कृष्ण ने पैर हटाया तो उस पत्ते का भी छेदन कर दिया। 

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श्री कृष्णा जी ने बर्बरीक की परीक्षा ली और उनकी क्षमता को देख कर पांडवों की रक्षा के लिए उनसे शीश का दान माँगा और कलयुग में अपने अपने ही श्याम नाम के रूप में पूजे जाने का वरदान मिला। 

खाटू श्याम की मृत्यु कैसे हुई?

जब श्री कृष्ण ने बर्बरीक की परीक्षा ली तो उनकी क्षमता को देख कर उन्होंने बर्बरीक का शीश दान में मांग लिया था। और उन्हें कलयुग में पूजे जाने का वरदान प्राप्त हुआ। 

दिल्ली, गुड़गांव, जयपुर से खाटू श्याम कितनी दूर है? Khatu Shyam ji Distance from Jaipur, Delhi and Gurugram

जयपुर से खाटू श्याम जी की दुरी 80 किलोमीटर है। दिल्ली से 315 किलोमीटर और गुड़गांव से 262 किलोमीटर दूर है।

हारे का सहारा क्यों कहा जाता है?

खाटू श्याम जी को हरे का सहारा भी कहा जाता है क्योकि जब कृष्ण जी ने महाभारत युद्ध में बर्बरीक से पूछा की आप किसकी तरफ से युद्ध करोगे तो बर्बरीक ने कहा था की में जो हारेगा में उसकी तरफ से युद्ध लडूंगा। इसलिए श्याम बाबा को हारे का सहारा के नाम से भी पूजा जाता है। 

मंदिर कौन से शहर में पड़ता है?

श्याम बाबा का मंदिर राजस्थान राज्य में सीकर जिले के खाटू ग्राम में बना हुआ है। यहां पर पुरे भारत वर्ष से लोग बाबा श्याम के दर्शन के लिए आते है। न केवल भारत से बल्कि पुरे विश्व से दर्शन के लिए आते है। 

खाटू श्याम जाने के लिए कौन सा रास्ता सही है?


वैसे तो बहुत से रस्ते है लेकिन आप यदि ट्रैन से सफर कर रहे है तो आप रींगस रेलवेस्टेशन पर उतर सकते है जहां से श्याम बाबा का मंदिर 18 किलोमीटर दूर है। जबकि यदि आप बस से ट्रेवल कर रहे है तो जयपुर बसस्टॉप से आपको बस हर आधा घंटे पर मिल जाएगी। वही यदि आप किसी और रस्ते से ट्रेवल कर रहे है तो रींगस से होते हुए आ सकते है। 


बस कहाँ से मिलेगी?

खाटू श्याम जी से बस सुविधा जयपुर और रींगस से सबसे उचित है क्योकि जयुपर से आपको राजस्थान रोडवेज की सुविधा सुचारु रूप से संचालित है और हर 30 मिनट पर बस संचालित की जाती है वही रींगस से लगातार श्याम बाबा के लिए वहां सुविधा उपलब्ध है

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